स्वरचित गणेश भजन ✍️
स्वरचित गणेश भजन
मान्या भजन संग्रह की रचना
पड़ गया देखो आज कैलाश पलना झूल रहे गणपति गौर
जी के अंगना
कैलाश पर आज छाई बहारें
देव सारे गणपति का रूप निहारे
शोभा उनकी बरनी न जाए आज जग मा..
झूल रहे गणपति
माथा विशाल और सूंड sundala
सूप जैसे कान लेकर आया मतवाला
नाम है गजानन हाथ पहने कंगना.
. झूल रहे गणपति
बाल और बुद्धि का दाता है ये
ब्रह्मा वेदों का ज्ञाता है ये
पूजा प्रथम इनकी होती शुभ काज मा
.. झूल रहे गणपति
विघ्नों को सबके हरते हैं गणपति
मंगल भक्तों का करते हैं गणपति
चले रिद्धि सिद्धि मैया सदा उनके संग मां .
. झूल रहे गणपति गौरा जी के अंगना
गीत लेखिका वीनू पाण्डेय ✒️
ये गीत मेरी कलम से 9/4/2021 को लिखा गया 👍
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